Posts

Showing posts with the label dil hulka ho gaya

मुंबई और हम

मुंबई में प्यार अक्सर जल्दी मिलता है और उतनी ही जल्दी खो भी जाता है। मैं और वह रोज़ लोकल ट्रेन के उसी डिब्बे में मिलते थे—भीड़, पसीना और शोर के बीच हमारी खामोशी धीरे-धीरे बातों में बदल गई। चाय की दुकानों पर अधूरी मुलाक़ातें, मरीन ड्राइव की हवा में लंबे सपने और बारिश में भीगती उम्मीदें—सब कुछ बहुत असली लगने लगा था। पर मुंबई सिर्फ़ सपनों का शहर नहीं, ज़िम्मेदारियों का भी है। उसकी नौकरी पुणे ले गई और मेरी ज़िंदगी यहीं अटक गई। हमने कहा था कि दूरी कुछ नहीं बदलती, पर सच्चाई यह थी कि हर दिन के साथ हम थोड़ा-थोड़ा खोते गए। आज भी जब चर्चगेट पर ट्रेन रुकती है, भीड़ वही है, शहर वही है—बस वह नहीं है। मुंबई ने हमें मिलाया, और शायद इसी शहर ने हमें सिखाया कि हर प्यार मुकम्मल नहीं होता, कुछ सिर्फ़ याद बनकर रह जाते हैं।

पहली नौकरी का प्रेशर

पहली नौकरी मिली तो सोचा था बहुत खुश रहूँगा। पर अब समझ आ रहा है कि responsibility के साथ pressure भी आता है। गलती हो जाए तो डर लगता है… लोग क्या सोचेंगे, job चली न जाए… रात को भी दिमाग बंद नहीं होता। काश कोई ऐसा दोस्त होता जिससे खुलकर बात कर सकूँ। इसलिए यहाँ लिख दिया — शायद थोड़ा हल्का महसूस हो।   

एक छोटी-सी बात दिल पर लग गई

आज सुबह सब normal था। बस घर में एक छोटी सी बात को लेकर बहस हो गई। असल में बात कुछ खास नहीं थी, पर शायद मन पहले से भरा हुआ था… इसलिए दिल पर लग गई। कई बार सोचता हूँ कि हम सब अंदर से इतने थके हुए रहते हैं कि छोटी चीजें भी चोट कर देती हैं। किससे कहूँ, क्या कहूँ — समझ नहीं आया। बस लगा यहाँ लिख दूँ तो शायद मन हल्का हो जाए।