कुछ रिश्ते सिर्फ़ सफ़र तक ही होते हैं

 कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे लोगों से मिलाती है, जिनसे कोई रिश्ता नहीं होता… लेकिन कुछ देर के लिए वो हमारी पूरी दुनिया बन जाते हैं।

वो सफ़र अचानक तय हुआ था।

न कोई प्लान, न कोई खास वजह। बस शहर की भागदौड़ से दूर कहीं निकल जाने का मन था। पहाड़ों की ओर जाने वाली बस में आख़िरी सीट मिली, और मैं खिड़की के पास बैठ गया।

कुछ देर बाद वो आई।

हाथ में बैग, चेहरे पर हल्की थकान और आँखों में जैसे कोई अधूरी कहानी। उसने मेरी बगल वाली सीट ली और बस एक छोटी-सी मुस्कान के साथ बैठ गई।

सफ़र शुरू हुआ, और कुछ देर तक सिर्फ़ खामोशी साथ थी।

फिर एक मोड़ पर बस ज़रा झटकी, और हमारी आँखें मिलीं।

वो हल्का-सा हँसी, और मैंने भी।

“पहली बार जा रहे हो?” उसने पूछा।

“हाँ,” मैंने कहा, “और तुम?”

“मैं भी… शायद खुद से मिलने।”

बात वहीं से शुरू हुई।

पहाड़ों के घुमावदार रास्तों के बीच हमारी बातें भी गहराने लगीं।

हमने नाम बताए, पर कहानी नहीं।

फिर धीरे-धीरे कहानी भी सामने आने लगी।

वो किसी रिश्ते से भागकर आई थी, और मैं किसी अधूरे सपने से।

हम दोनों के पास वजह अलग थी, पर खालीपन एक जैसा।

रास्ते में जब बस रुकी, तो हमने साथ चाय पी।

उसने कहा, “अजीब है ना… अजनबी होकर भी इतना कुछ कह देना आसान लगता है।”

मैंने सिर हिलाया।

शायद इसलिए क्योंकि यहाँ कोई हमें जज करने वाला नहीं था।

दो दिन हम एक ही जगह रुके।

घूमे, हँसे, तस्वीरें लीं… और कभी-कभी बिना कुछ बोले बस साथ बैठे रहे।

वो सफ़र किसी कहानी जैसा लगने लगा था—जहाँ कोई वादा नहीं था, फिर भी सब सच्चा लग रहा था।

लेकिन हर सफ़र का एक आख़िरी पड़ाव होता है।

वापसी के दिन, बस फिर वही थी… सीटें भी वही, रास्ते भी।

बस इस बार खामोशी थोड़ी भारी थी।

“अब क्या?” मैंने पूछा।

वो मुस्कुराई, लेकिन आँखें कुछ और कह रही थीं।

“अब हम फिर अजनबी बन जाएँगे।”

“इतनी आसानी से?”

“शायद हाँ… क्योंकि कुछ रिश्ते यादों में ही अच्छे लगते हैं।”

बस शहर के करीब पहुँच रही थी।

लोग उतरने लगे।

वो भी उठी।

“ख़याल रखना,” उसने कहा।

मैंने बस इतना ही कहा,

“तुम भी।”

और वो चली गई।

भीड़ में कहीं खो गई… जैसे कभी थी ही नहीं।

आज भी जब कभी कहीं सफ़र करता हूँ,

तो हर अनजान चेहरे में उसे ढूँढता हूँ।

शायद वो फिर कभी मिले,

या शायद नहीं।

पर अब समझ आ गया है—

कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में सिर्फ़ सफ़र तक ही आते हैं, मंज़िल तक नहीं।

और फिर…

वो हमेशा के लिए अजनबी बन जाते हैं।

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