वो आख़िरी मैसेज

 रात के 11 बज चुके थे। मोबाइल की स्क्रीन बार-बार जल रही थी, लेकिन इस बार कोई मैसेज नहीं था… सिर्फ़ वक़्त का एहसास था।

आरव ने फोन टेबल पर रखा और खिड़की से बाहर देखा। शहर अब भी जाग रहा था, पर उसके अंदर कुछ चुप हो चुका था।

आज पूरे तीन साल हो गए थे उसे गए हुए।
रिया।

ना कोई झगड़ा, ना कोई शिकायत… बस एक दिन उसने कहा था —
“शायद हम एक-दूसरे के लिए नहीं बने।”

उसके बाद सब कुछ धीरे-धीरे ख़ामोश हो गया।

आरव आज भी हर रात सोने से पहले उसी चैट को खोलता था, जहाँ आख़िरी मैसेज लिखा था —
“ख़याल रखना… अपना भी।”

कितना अजीब होता है ना?
कोई इंसान आपकी ज़िंदगी से चला जाता है, लेकिन उसकी कही एक लाइन पूरी ज़िंदगी आपके साथ चलती रहती है।

आज पहली बार उसने उस चैट को डिलीट करने का सोचा।
उँगली स्क्रीन पर गई…
पर दिल काँप गया।

उसी पल एक नोटिफिकेशन आया —
Unknown Number: “क्या हम कभी सच में किसी को भूल पाते हैं?”

उसका दिल तेज़ धड़कने लगा।
नंबर सेव नहीं था, लेकिन सवाल बहुत जाना-पहचाना लगा।

उसने जवाब नहीं दिया।
बस फोन बंद कर दिया।

कुछ रिश्ते जवाब नहीं माँगते…
वो बस याद बनकर रह जाते हैं।

उस रात उसे नींद नहीं आई,
लेकिन दिल हल्का ज़रूर हो गया।

कभी-कभी ज़िंदगी हमें closure नहीं देती,
बस आगे बढ़ने की ताक़त दे देती है।

और शायद…
यही काफी होता है।

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