पहला प्यार या आखिरी!
मेरा नाम शायद उतना मायने नहीं रखता,
जितना मेरी पहचान… और मेरी पहचान यही है कि मैं आज भी नेहा से मोहब्बत करता हूँ।
हाँ, नेहा—यही नाम है उसका।
गौर सा रंग, सुनहरी सी आँखें, गुलाबी गाल… एक मासूम चेहरा।
जब मैं उससे पहली बार मिला था, तो बस उसे ही देखता रह गया था—एकटक।
और वो…?
वो भी मुझे ही देख रही थी। पता नहीं…
शायद ये मेरी गलतफ़हमी थी,
या फिर उसे देखना इतना अच्छा लग रहा था कि ये ध्यान ही नहीं रहा कि उसकी नज़रें कब मुझ पर पड़ीं।
हमारी कई बार मुलाकातें हुईं,
पर बात कभी नहीं हो पाई।
या शायद… मुझमें हिम्मत ही नहीं थी उससे बात करने की।
आज उस बात को कई साल बीत चुके हैं।
और आज… अचानक फिर मुलाकात हो गई—बाज़ार में।
उसके हाथों में किसी और का हाथ था… और दोनों बहुत खुश दिख रहे थे।
हो भी क्यों न? उनकी लव मैरेज जो हुई थी।
लव मैरेज… हाँ,
मतलब वो किसी और से प्यार करती थी,
और मैं…
मैं तो सिर्फ़ नज़रों के मिलने को ही प्यार समझ बैठा था।
सच कहूँ तो,
उसे इतने सालों बाद देखकर अच्छा लगा।
क्यों?
पता नहीं…
पर अच्छा लगा।
Comments
Post a Comment
Kripya personal number ya identity share na karein.